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पिछली शताब्दी में सऊदी अरब में फुटबॉल की शुरुआत हुई और आज भी वह एशिया की श्रेष्ठ टीमों में है। १९५९ में उन्होने सऊदी अरब फुटबॉल महासंघ का गठन किया व उसी वर्ष फीफा व ए.एफ.सी. की सदस्यता ग्रहण की।
अपने खिलाडियों का स्पर्धात्मक रवैया बरकरार रखने के लिए सऊदी अरब महासंघ कई स्पर्धाओं का आयोजन करता है। प्रतिवर्ष १५३ क्लबों के लिए वह १० विभिन्न स्पर्धाओं का आयोजन करता है, जिनमें सिनीयर, u-२३, u-१७ खिलाडियों के लिए प्रिमीयर लीग, सिनीयर, u-२३, यूथ तथा u-१७ के लिए प्रथम डिवीजन, एफ.ए. कप, सेकंड डिवीजन तथा यूथ चेम्पियनशिप प्रमुख है। प्रांतीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब ने कई सफलताए अर्जित की है। उन्होने गल्फ कप तीन बार जीता है व १९८४ से २००० तक सभी एशियन कप में हिस्सा लिया है। सिर्फ २००४ के एशियन कप क्वालिफाईंग मैचों में उन्हे हार का मुंह देखना पडा था।
सऊदी टीम पांच बार एशियन कप में खेली व उसमें से उन्होने तीन बार - १९८४, १९८८, १९९६ - इस प्रतिष्ठित खिताब पर कब्जा किया। १९९२ व २००० में वे जापान से १-० के अंतर से हारे। उन्हे १९९४, १९९८ तथा २००२ के फीफा विश्व कप में खेलने का भी गौरव हासिल है।
सऊदी को सबसे बडी सफलता १९८९ में मिली जब उन्होने फीफा u-१७ चेम्पियनशिप जीती थी। फायनल में उन्होने स्कॉटलैंड को हराया था। आंकडों के अनुसार सऊदी में १६,१६० खिलाडी, ५३० रैफरी और २६० कोच पंजीकृत है। इनमें से दस रैफरी अंतर्राष्ट्रीय स्तर के है।
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